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कोरोना काल (covid-19) में रामचरित्र मानस बनी सहारा, डूबते को मिला किनारा

कोरोना काल (covid-19) में रामचरित्र मानस बनी सहारा, डूबते को मिला किनारा
राजस्थान-बूंदी जिले में कोरोना काल में रामायण भगवत गीता ने लोगों को बड़ा सहारा दिया है पूरे देश में धार्मिक ग्रंथों के पाठ कों की संख्या तेजी से बढ़ोतरी  हुई|

घरों में कैद लोगों ने वेद पुराण व अन्य धार्मिक पुस्तकें पढ़ कर खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाया है।

वर्तमान में धार्मिक पुस्तक है, जिन के पाठकों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्कंद पुराण, रामायण, भगवत गीता, श्री नरसिंह पुराण, श्री नारद पुराण, शिव पुराण, संक्षिप्त महाभारत, स्त्रोत रत्नावली, मत्स्य पुराण, वाल्मीकि पुराण, राम चरित्र मानस श्रीमद्भागवत गीता रहस्य और सर्व मनोकामना जैसी पुस्तकें प्रमुख हैं। एमजी रोड स्थिति गोरखपुर प्रिंटिंग प्रेस की दुकान में वेद पुराणों की मांग तेजी से बढ़ी है।

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राजस्थान बूंदी 

महानगर के ज्योतिष आचार्य राजेंद्र शर्मा आचार्य का कहना है| कि कोरोना काल के प्रकोप से बचने के लिए लोगों ने गीता, रामायण में पुराणों का अध्ययन किया। जिससे लोगों में एक जागृति पैदा हुई और गरीबों को अपने भाई बंधुओं का इस बुरे समय में साथ दिया।
ग्रंथों में से एक बात है जो लोग आज भी इन ग्रंथों को पढ़कर अच्छे रास्ते पर चल रहे हैं।

लॉकडाउन मैं बढ़ गई रामचरित्र मानस की कीमत लॉकडाउन से पूर्व गोरखपुर प्रिंटिंग प्रेस से ₹260 में मिलने वाली रामचरित्र मानस की कीमत अब ₹300 हो गई है।

देशभर में धार्मिक किताबों की बिक्री करीब दोगुनी हो गई हैं।
मांग बढ़ती जा रही हैं जबकि सप्लाई उस अनुपात में ना होने से ग्राहकों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।

नोट:- कोरोना काल में मैं आपसे आशा करूंगा कि आप भी रामचरित्र मानस पढ़ने का अवसर लो। जिससे तन मन का शुद्धिकरण हो पाए। जब कोई दवा काम नहीं करती हो तो परमात्मा की शरण में जाना ही अति उत्तम है।

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