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Personal Finance Managemen in hindi | व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन क्या है जाने हिंदी में

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Personal Finance Management 

Personal Finance Management in hindi | व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन क्या है जाने हिंदी में ?


व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन से आशय हैं,कि एक व्यक्ति अपने व्यय का नियोजन इस प्रकार करें,कि वह अपनी सीमित आय का कुछ भाग बचा कर निवेश कर सके तथा आकस्मिक घटनाओं का सामना कर सके। व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन के दो महत्वपूर्ण घटक बैंकिंग एवं बीमा है ।

    बैंकिंग/Banking

    बैंक एक ऐसी वित्तीय संस्था है,जो अपने ग्राहकों को बैंकिंग व अन्य वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराता है। सामान्य तौर पर बैंक को एक ऐसी संस्था के रूप में जाना जाता है, जो ग्राहकों को मूलभूत बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यक्तियों को जमा राशि स्वीकार करता है,साख सृजन कराता है, तथा उसी आधार पर ग्राहकों को ऋण संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराता है। बैंकिंग कहलाता है।

    बैंकिंग संबंधी विभिन्न प्रक्रिया / Banking related process

    (बैंकिंग संबंधित प्रक्रिया या बैंक के मुख्य कार्य निम्न प्रकार हैं) 

    जमा स्वीकार करना

    इन बैंकों का प्रमुख कार्य जनता से जमा स्वीकार करना है। इन राशि के माध्यम से बैंक बचतो ( savings) को प्रोत्साहित करने का कार्य करते हैं।ईन जमा बचतो पर जमाकर्ता को बैंक द्वारा ब्याज दिया जाता है।

    विभिन्न प्रकार के खाता खोलना 

    बैंक जमा कर्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार निम्नलिखित प्रकार के खातों की सुविधा भी उपलब्ध कराता है

    (1) स्थाई खाता (permanent account) अमेरिका में इसी मियादी जमा (time deposit ) कहा जाता है।
    इस खाते में एक निश्चित अवधि के लिए रकम जमा की जाती हैं।
    स्थाई खाता बचत खाते की तुलना में अधिक ब्याज देता है। जितने समय के लिए रकम जमा की गई हैं, उतना ही समय बीत जाने पर ही निकासी हो सकती हैं।

    निश्चित अवधि के भीतर ही निकासी करना आवश्यक हो जाता है, तब स्थाई जमा की जमानत पर कर्ज मिल जाता है। खाता कोहली बंद करने पर जिस शर्त पर रुपैया जमा किया गया होता है, उसका पालन नहीं हो पाता है अतः उक्त समय जो ब्याज रहता है वही मिलता है।

    (2) नगद साख खाता (Cash Credit account) यह एक ऋण खाता हैं। इस खाते के अंतर्गत बैंक खाता धारी को एक निश्चित मात्रा तक ऋण प्राप्त करने का अधिकार देता है। किसी सीमा के अंदर ऋणी अपनी आवश्यकता अनुसार बैंक से रुपए लेता और जमा भी कर आता है। ब्याज उसी राशि पर वसूल किया जाता है, जो वास्तव में ऋणी के पास रहते हैं।

    (3) आवर्ती जमा खाता (Recurring account)इस प्रकार के खातों में, एक निश्चित राशि प्रतिमाह , एक निश्चित अवधि के लिए जमा कराई जाती है। बिना किसी साधारण परिस्थिति के इसमें से रकम को, निश्चित अवधि के पूर्ण होने से पहले निकाला नहीं जा सकता। इन पर दिया जाने वाला ब्याज, जमा खाते की तुलना में अधिक होता है

    (4) चालू खाता (current account) इस खाते में जमा करने वालों को अधिकार है की वे अपनी इच्छा अनुसार धन को निकाल सकते हैं एवं जमा करा सकते हैं, इसलिए अमेरिका में इसे मांंग जमा भी कहा जाता है। बैंक इस प्रकार के खातों पर जमा हेतु कोई ब्याज नहीं देते एवं एक निश्चित राशि से कम जमा पर जमा करता से व्यय वसूल करते हैं।

    (5) बचत खाता (saving account) इस प्रकार का खाता प्राय: उन व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होता है, जो कभी-कभी तथा बहुत छोटी-छोटी मात्राओं में रुपया जमा कराना या निकालना चाहते हैं। बचत खाता मुख्यत निश्चित एवं कमाई वाले गृहस्थों की सुविधा के लिए तथा उनके धन संचय की प्रवृत्ति जागृत करने के लिए खोला जाता है।

    ऋण देना

    बैंकों का अन्य महत्वपूर्ण कार्य ऋण देना है। बैंक अपने ग्राहकों, उत्पादकों व व्यापारियों आदि को विभिन्न प्रकार की जमानतो पर ऋण देते हैं, यह ऋण अचल संपत्तियों तथा व्यक्तिगत जमानत के आधार पर नहीं दिया जाता।
    बैंक निम्नलिखित प्रकार ऋण देते हैं 
    •ओवरड्राफ्ट चालू खाता वाले जमा करता को उनके खाते में जमा रकम से अधिक राशि निकालने की सुविधा।
    •ऋण तथा अग्रिम (Debt and Advance)
    •विनिमय पत्रों की कटौती (Retrenchment of Exchange Bills)
    •नगद साख (cash credit)
    •सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश (investment in public securities)

    ई-बैंकिंग एवं इंटरनेट बैंकिंग

    किसी भी बैंक द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओ को किसी भी स्थान से कंप्यूटर, मोबाइल, या किसी आने यंत्र द्वारा इंटरनेट के माध्यम से प्रयोग करना इंटरनेट बैंकिंग कहलाता है।
    इसके लिए बैंक वेबसाइट और मोबाइल ऐप बनाकर उससे अपने ग्राहकों को इंटरनेट के माध्यम से ई-बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराते हैं। इंटरनेट बैंकिंग द्वारा personal identification number (pan) की सहायता से बैंक से जुड़ी गतिविधियां किसी विषय पर अपनी राय, सुझाव, शिकायत आदि दर्ज कराना, चेक बुक, पासबुक, ड्राफ्ट आदि मंगवाना, बिल व किस्त भुगतान, धनराशि का हस्तांतरण आदि कर सकता है।
    यह सुविधा भी 24 घंटे में उपलब्ध रहती हैं।

    एटीएम सुविधा प्रदान करना

    स्वचालित टेलर मशीन ( automated teller machine, ATM) द्वारा ग्राहक बैंक से जुड़ी अधिकांश गतिविधियां जैसे :- धन निकासी, धन जमा कराना, चेक बुक अपडेशन, खाते में उपलब्ध राशि की जानकारी आदि पूर्ण कर सकता है। यह सुविधा 24 घंटे में उपलब्ध होती है।
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    automated teller machine, ATM

    एटीएम के निम्न प्रकार है
    •ह्राईट लेबल एटीएम
    •ब्राउन लेबल एटीएम
    •ऑनलाइन एटीएम
    •ऑफलाइन एटीएम
    •स्टैंण्ड अलोन एटीएम
    •ऑन-साइट एडीएम
    •ऑफ-साइड एटीएम

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    भारत में एटीएम का इतिहास

    •भारत में सबसे पहला एटीएम वर्ष 1987 में HSBC BANK, द्वारा मुंबई में स्थापित किया गया। भारत की पहली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी 'टाटा कम्युनिकेशन पेमेंट सॉल्यूशन'(इण्डीकैश) द्वारा चंद्रपाड़ा थाणे (महाराष्ट्र) एटीएम स्थापित किया गया ।

    •मोबाइल एटीएम प्रारंभ करने वाला पहला बैंक ICICI BANK था।
    •दृष्टिहीन के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा पहला बोलता एटीएम अहमदाबाद (गुजरात) में प्रारंभ किया गया था।
    •भारत का सर्वप्रथम ग्रामीण बैंक एटीएम वाराणसी में नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन में जारी किया।

    एटीएम द्वारा नई बैंकिंग सेवाएं

    भारतीय रिजर्व बैंक ने 14 जनवरी 2016 को मशीन की सहायता से बैंकिंग प्रक्रिया तथा बैंक परिचालन की सुविधा को स्वीकृति प्रदान की। इसके द्वारा एटीएम पर ही बैंक शाखा उनकी भांति ग्राहकों को सभी बैंकिंग सुविधा प्राप्त हो सकेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इस निर्णय के बाद अब एटीएम ही अपने आप में संपूर्ण बैंक की भूमिका के रूप में होंगे। इसके साथ ऋण के लिए आवेदन करने, ड्राफ्ट बनवाने तथा बिलों के भुगतान करने जैसी सुविधाएं भी एटीएम से प्राप्त की जा सकेगी। भारतीय स्टेट बैंक का लगभग 48,000 मशीनों का सबसे बड़ा एटीएम नेटवर्क है।

    अपने ग्राहकों को जानो

    यह बैंक की प्रमुख क्रिया है KYC (know your customer) ग्राहक के बारे में जानकारी अपडेट करने की एक सामान्य प्रक्रिया है। किस प्रक्रिया के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई व्यक्ति कहीं बैंकिंग सुविधा का दुरुपयोग तो नहीं कर रहा है।यह बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाला एक लोकप्रिय शब्द है।अपने ग्राहक की पहचान से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए केवाईसी(KYC) विधि का प्रयोग किया जाता है।इस विधि से वित्तीय संस्थाएं सूचनाओं का संग्रहण करते हैं, जिसके आधार पर ग्राहक की पहचान और उनके पते की सही जानकारी प्राप्त की जाती है।

    अपने ग्राहक को जानने संबंधित पंजीयन

    KYC शब्द ग्राहक की पहचान प्रक्रिया के दौरान उपयोग किया जाता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से बैंक का प्रयास खाते के असली मालिक की पहचान सुनिश्चित करना है। ग्राहक के व्यापार का प्रकार अर्थात वह किस प्रकार का व्यापार करता है, के बारे में पता लगाने का प्रयास भी इसके द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह भी जानने की कोशिश की जाती है कि उसके खेतों में होने वाले लेनदेन उसके व्यापार में मुताबिक हैं भी या नहीं। इसी विषय में पता होने से बैंक अपने जोखिम का प्रबंधन ज्यादा सक्षम तरीके से कर पाते हैं। केवाईसी निर्देशों का मतलब जानबूझकर या अनजाने में की जाने वाली अपराधिक गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग का पता लगाना है।बैंक ग्राहक की विस्तृत जानकारी के आधार पर उसका विवरण तैयार करता है जिसमें उसके सामाजिक वित्तीय सूचना, बिजनेस, उसका खाता खोलने का उद्देश्य और कारण, फण्ड का स्त्रोत, मासिक संभावित, मासिक निकासी जैसे बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है।

    पंजीयन संबंधित दस्तावेज निम्न है

    केवाईसी आवेदन पत्र उपयुक्त प्रारूप में •पासपोर्ट साइज का फोटो •फोटो युक्त पहचान दस्तावेज जैसे:-मतदान पहचान पत्र •ड्राइविंग लाइसेंस, कर्मचारी का पहचान पत्र आदि की छायाप्रति मूल पहचान पत्र •निवासी का प्रमाण पत्र, फोटो यक्त मूल निवास प्रमाण पत्र •नल बिजलियां बेसिक टेलीफोन का बिल

    know your customer


    •केवाईसी आवेदन पत्र उपयुक्त प्रारूप में
    •पासपोर्ट साइज का फोटो
    •फोटो युक्त पहचान दस्तावेज जैसे:-मतदान पहचान पत्र
    •ड्राइविंग लाइसेंस, कर्मचारी का पहचान पत्र आदि की छायाप्रति मूल पहचान पत्र
    •निवासी का प्रमाण पत्र, फोटो यक्त मूल निवास प्रमाण पत्र
    •नल बिजलियां बेसिक टेलीफोन का बिल

    बैंकों का महत्व / importance of bank

    बैंकों के महत्व को आर्थिक विकास की दृष्टि से निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है

    बचत की आदत का प्रोत्साहन

    बैंक सुविधा उपलब्ध होने से लोगों में बचत करने की आदत को बढ़ावा मिलता है तथा लोगों अपनी बचत रूपी धनरशि को बैंक में जमा करने के लिए उत्सुक रहते हैं।

    नगदी को सुरक्षित रखना

    बैंक नगदी को सुरक्षित रखने का कार्य भली-भांति करता है।बैंक के साथ-साथ नगदी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आम नागरिक की भी है। आम नागरिक नगदी को सुरक्षित रखने के कुछ प्राय जैसे -नोट पर कुछ लिखे नहीं, नोट में पिन ना लगाएं, नोट को अधिक मोड़े नहीं आदि कर सकता। नोटों को सुरक्षित रखें,

    नदी को सुरक्षित रखने के लिए यह भी आवश्यक है कि नदी का लेनदेन बैंक में केवल उन्हीं कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए, जो इसके लिए अधिकृत हैं। इन कर्मचारियों का पुनरावलोकन उचित रूप से बैंक अधिकारियों द्वारा प्रत्येक क्षेत्र में किया जाना चाहिए।

    कीमतों में उतार-चढ़ाव पर रोक

    केंद्रीय तथा अन्य बैंक शाखा तथा मुद्रा की मात्राको नियंत्रित करते हैं, जिससे उनकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर भी रोक लगाई जाती है। कीमत वर्दी के समय साख संकुचन द्वारा तथा कीमतों में कमी होने पर साख विस्तार द्वारा कीमतों में स्थिरता लाई जाती है।

    बैंक द्वारा साख निर्माण

    बैंक अपने नगद जमा से कहीं गुना अधिक धनराशि उधार देकर देश में निवेश व रोजगार को बढ़ावा देते हैं। इससे बैंकों का साख विस्तार होता है।

    बैंक द्वारा वित्तीय साधनों की पूर्ति में संतुलन

    बैंक द्वारा उन क्षेत्रों से धनराशि एकत्र की जाती है, जहां उसकी अधिकता है, सत्ता इस धनराशि को कम धनराशि वाले स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाता है इसके द्वारा वित्तीय साधनों की पूर्ति में संतुलन बना रहता है

    बैंकों के अन्य महत्व

    बैंकों के अन्य महत्त्व निम्न प्रकार हैं-

    (1) किसी से पत्र के आर्थिक विकास में योगदान (Role in Economic Development) बैंकों की शाखाएं जिन क्षेत्रों में भी खोली जाती हैं, क्षेत्र में कृषि, उद्योग, आदि को रुपयों का लाभ मिलने लगता है।


    (2) धन राशि का स्थानांतरण (Transaction of money) बैंकों द्वारा बड़ी से बड़ी धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरलता सेे भेजा जा सकता है, जिसकेे कारण रुपयों की गतिशील में वृद्धि हुई है।


    (3) विदेशी व्यापार में सहायक(Helpful in foreign trade) विदेशी मुद्रा का लेन देन विनिमय बैंकों द्वारा कियाा जाता है ‌। यह बैंक मुद्रा लेन-देन करके विदेशी व्यापार को प्रोत्साहित करते हैं।


    (4) भुगतान को सरल बनाना (payment in easy way) बैंकों द्वारा भुगतान का कार्य अत्यंत सरल हो गया है। लोग चेक, ड्राफ्ट, आदि के द्वारा बड़ी सरलता से एक दूसरेे को भुगतान कर देते हैं


    (5) मुद्रा का निर्गमन (lssue of currency) वर्तमान समय में मुद्रा का निर्गमन  किसी देश केे केंद्रीय बैंक द्वारा किया जाता है। यह बैंक देश कीी मौद्रिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर मुद्रा का निर्गमन करता हैैैैैै।


    (6) सरकार को वित्तीय सहायता (Financial help of Government) केंद्रीय बैंक आवश्यकतानुसार सरकार को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराता है।


    (7) सार्वजनिक ऋण का प्रबंध (Management of public debt) आवश्यकतानुसार अनुसार बैंकों द्वारा सार्वजनिक ऋण की भी व्यवस्था की जाती है।


    (8) बैंकों द्वारा मौद्रिक नीति को लागू करना (Regulate and issue of monetary policy) सरकार तथा केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति बनाते हैं, जिस को लागू करनेे का दायित्व देश केेे बैंकों पर ही होता है।


    (9) ग्राहकों को विभिन्न सेवाएं तथा सुविधाएं देना
    (Provide of different service and facilities)

    बैंक के द्वारा अपने ग्राहकों को विभिन्न सेवाएं तथा सुविधाएं प्रदान की जाती है; जैसे-ग्राहकों को औरतें भुगतान का लेन देन, यात्री चेक जारी करना, बीमा किस्त अदा करना, आदि

    व्यक्तिगत संकट/Personal Risk

    एक व्यक्ति का जीवन अनिश्चितताओं से भरपूर है तथा इन अनिश्चितताओं के चलते उसे अपने जीवन काल में अनेक व्यक्तिगत संकटों का सामना करना पड़ता है जोकि निम्नलिखित हैं-

    (1) जीवन का संकट (2) संपत्ति को अनुसार का संकट  (3) बीमारी का संकट (4) एक्सीडेंट से संपूर्ण अथवा आंशिक  अयोग्यता का संकट आदि। इन सब संकटों से बचने के लिए तथा इन संकटों से होने वाली हानि से रक्षा हेतु एक व्यक्ति बीमा का सहारा ले सकता है।  बीमा /Insurance
    Personal Risk
    (1) जीवन का संकट
    (2) संपत्ति को अनुसार का संकट
    (3) बीमारी का संकट
    (4) एक्सीडेंट से संपूर्ण अथवा आंशिक  अयोग्यता का संकट आदि। इन सब संकटों से बचने के लिए तथा इन संकटों से होने वाली हानि से रक्षा हेतु एक व्यक्ति बीमा का सहारा ले सकता है।

    बीमा /Insurance

    बीमा की परिभाषा एक लिखित संविद के रूप में
     की जा सकती हैं, जिसके अंतर्गत एक पक्ष दूसरे पक्ष के लिए नियत राशि जिसे प्रीमियम कहां जाता है, के प्रतिफल में, अनिश्चितता के कारण होनेेे वाले नुकसान या क्षति के बदलने में क्षतिपूर्ति को पूरा करना होता है। वहां व्यक्ति/व्यवसायी जो अपने जीवन/संपति का बीमा  कराता है। बीमित कहलाता है। वह एजेन्सी जो बीमा करार करवानेे के पक्ष में है बीमा करता अथवा बीमा कंपनी कहलाती है। बीमा किए जाने वाला करार या सुविधा पॉलिसी कल आता है। बीमा पॉलिसी मेंं जीव बीमा मृत्यु और गेर जीवन बीमा मेंं समय स्वास्थ्य और संपत्ति से जुड़े जोखिम के लिए सुरक्षा मिलती है।

     टर्म इंश्योरेंस/Term insurance

    यह व्यक्ति के जीवन के जोखिम को लेकर निश्चित अवधि के लिए बीमा सुरक्षा देती है। इसमें पॉलिसी की धारक की मृत्यु उसके आश्रितों को बीमा की रकम भुगतान किया जाता है। यदि पॉलिसी धारक पूरी अवधि तक जीवित रहता है तो उसे कोई भुगतान नहीं मिलता। Term पॉलिसी का उद्देश्य केवल सुरक्षा देना है और इसी वजह से इसका प्रीमियम भी अन्य योजनाओं की तुलना में कम होता है। टर्म इंश्योरेंस के द्वारा कम कीमत पर अधिक सुरक्षा ले सकते हैं।

     एनडाउनमेंट पॉलिसी/Endowment policy

    इससे टर्म इंश्योरेंस की तरह की ही बीमा योजना है। इसमें पॉलिसी धारक को अवधि पूरी होने पर सर्वाइवल बेनिफिट प्रदान किया जाता है। यह निश्चित अवधि के लिए होती है और समाप्त होने पर व्यक्ति को सम हे एश्योर्ड  के साथ पॉलिसी पर जमा बोनस मिलता है । यदि पॉलिसी की परिपक्वता से पहले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैं तो उसके नामांकित को बीमा की रकम अदा की जाती है। एनडाउनमेंट  पॉलिसी के प्रीमियम का निवेश बीमा कंपनियां सरकारी सेक्टर जैसे कम जोखिम वाले उत्पादों में करती है

    होल लाइफ पॉलिसी /Whole life policy

    इस बीमा पॉलिसी के अंतर्गत बीमा धारक को पूरे जीवन के लिए सुरक्षा देती हैं और उसके आश्रितों को लाभ का भुगतान किया जाता है। पॉलिसी धारकों जीवित रहने के दौरान कोई लाभ नहीं मिलता।

    मनी बैंक पॉलिसी/Money Bank policy

     इस बीमा योजना के अंतर्गत भीम आधार को जोकिंग से सुरक्षा के साथ ही निश्चित अंतराल पर भुगतान भी दिया जाता है। यह पॉलिसी निश्चित अवधि के लिए जारी की जाती है और धारक को एश्योर्ड का भुगतान पॉलिसी की अवधि के दौरान मिलता है। यदि व्यक्ति की मृत्यु पॉलिसी की अवधि के दौरान होती हैं तो उसके आश्रितों को बीमा राशि और जमा बोनस का भुगतान किया जाता है।

    यूनिट लिंक्ड बीमा योजना/Unit Linked Insurance Plan

    इस बीमा योजना के अंतर्गत सुरक्षा के फण्ड जैसे निवेश का लाभ भी मिलता है। इसके अतिरिक्त इसमें निवेश हेतु बहुत से विकल्प होते हैं, इसमें ग्राहक अपनी क्षमता के अनुसार निवेश का उपयुक्त विकल्प चुन सकते हैं। इसमें प्रीमियम का एक हिस्सा मोरटैलिटी चार्ज और अन्य शुल्क में और शेष का निवेशक द्वारा चुने गए फण्ड में निवेश किया जाता है। बीमा नियामक आयोग ने हाल ही में इस योजना के शुल्कों की अधिकतम सीमा कर दी जिससे इसकी लोकप्रियता बढ़ने की काफी संभावना है।

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    FAQ

    1. व्यक्तिगत वित्त प्रबन्धन के महत्त्वपूर्ण घटक क्या हैं?

    उत्तर:- व्यक्तिगत वित्त प्रबन्धन के घटक

    (1) बैंकिंग

    (ii) बीमा

    2. बैंक साधारणत: क्या करता है?

    उत्तर:- बैंक बचतो को जमा करता है एवं उत्पादक सेक्टरों में उनका निवेश करता है।

    3. सामान्यतया खाते कितने प्रकार के होते हैं?

    उत्तर:- सामान्यतया खाते दो प्रकार के होते हैं-बचत खाता एवं चालू खाता।

    4. PIN क्या है?

    उत्तर:- PIN चार अंकों का एक पासवर्ड है, जिसका उपयोग एटीएम में किया जाता है।

    5. भारत में एटीएम का इतिहास बताइए।

    उत्तर:- भारत में सबसे पहला ATM वर्ष 1987 में HSBC बैंक द्वारा मुम्बई में स्थापित किया गया।

    6. बैंकों के महत्त्व के किन्हीं दो कारणों को बताइए।

    उत्तर:- बैंकों के महत्त्व के दो कारण 

    (1) पूँजी में वृद्धि

    (2) कीमतों में उतार-चढ़ाव पर रोक

    7.बीमा क्या है?

    उत्तर:-यह वास्तव में व्यक्ति जोखिम को लोगों की एक बड़े समूह के मध्य बांटकर हानियों को सबके मध्य वहन करने के योग्य बनाने की विधि है।

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